Amazing benefits of sugarcane juice in hindi | गन्ने के जूस के फायदे और नुकसान | sugarcane juice calories

Amazing benefits of sugarcane juice in hindi | गन्ने के जूस के फायदे और नुकसान | sugarcane juice calories

Amazing benefits of sugarcane juice in hindi | गन्ने के जूस के फायदे और नुकसान | sugarcane juice calories
गन्ने के जूस के फायदे और नुकसान

गन्ना प्रकृति की एक अनुपम देन है।

गन्ना प्रकृति की एक अनुपम देन है। इससे गुड़ और शक्कर बनती है, पर इसके साथ-साथ इसका रस भी बड़ा उपयोगी और बल-वीर्यवर्द्धक होता है। जिन्हें वीर्यपात अधिक होता है, उन्हें खोई हुई शक्ति की प्राप्ति के लिए रक्त और पित्त को शान्त करने वाला गन्ने का रस प्रतिदिन पीना चाहिए। गन्ने का रस फेफड़ों को मुलायम करता है, खांसी को दूर करता है और डकार लाता है।
गन्ने का रस लाभदायक तो है ही, पर उससे अधिक लाभ गन्ना दांतों से छीलकर खाने और रस चूसने से है। ऐसा करने पर दांत चमकीले और मजबूत होते हैं। गन्ना दांतों से छीलकर खाना और चूसना ज्यादा लाभदायक है। बनी बनायी गंडेरी चूसने या रस पीने से कहीं अधिक लाभ इसमें है। गन्ने के रस में थोड़ा नीबू का रस और सेंधा नमक मिला देने से और लाभ होता है। यह पाचक और रेचक हो जाता है। गन्ने के रस में बर्फ न मिलायें, तो अच्छा है। बर्फ प्राय: गन्ने में कुछ तत्त्वों की शक्ति क्षीण कर देती है।

जब गरमी पड़ रही हो।

प्रतिदिन दोपहर के समय, जब गरमी पड़ रही हो, गन्ने के शीतल रस में नीबू का रस मिश्रित कर पीने से शान्ति मिलती है। ताजा रस निकलवाकर टॉनिक के तौर पर प्रयोग में लाना चाहिए। यह प्यास और जलन को शान्त करता है। गन्ने का ताजा रस शक्ति व स्फूर्तिदायक है। गन्ने का रस फ़ीका या स्वादहीन हो, तो उसका पान न करें। इस प्रकार का गन्ना दोषग्रस्त होता है। गन्ने का ज्यादा पतला होना तथा छिलके को देखने पर ही आप अनुमान लगा सकते हैं कि वह चूसने या रस निकालने लायक नहीं है।

गन्ने का ताजा रस निकलवाकर पीना।

अपने सामने गन्ने का ताजा रस निकलवाकर पीना ज्यादा अच्छा है। उस बेचने वालों से थोड़ा सावधान रहना अच्छा है। उत्तर प्रदेश में प्राय: सभी किस्मों, जैसे-पौडाक, भीरुक, वंशक, वा बडौखा, अधिक पोरों वाला, काला गन्ना, चीनिया, कष्ठक्षु, बारिक पत्रों वाला, नैपली, दीर्घ पत्र, काला या नीला पौंडा, कोशकार के गन्ने देखने में आते हैं। सहासपुर के सफ़ेद गन्ने तथा सागरी गन्ने अधिक नम और श्रेष्ठ होते हैं। मुरादाबादी सफ़ेद व काले पौंडे भी अच्छे होते हैं।
देहरादून के पुरानी जाति के सफ़ेद मगर रौल के गन्ने स्वादिष्ट और मधुर होते हैं। महाराष्ट्र का सफ़ेद पौंडा रस से परिपूर्ण होता है। निपाणी का गन्ना रस युक्त तथा लम्बा होता है। आप जिस प्रदेश में भी हों और वहां जैसा गन्ना मिलता हो, उसका भी प्रयोग कर स्वास्थ्य बनाना चाहिए।

गन्ने के रस से गुड़ बनता है।

गन्ने के रस से गुड़ बनता है। मिल की सफ़ेद चीनी के स्थान पर गुड़ का ही प्रयोग करना चाहिए। गुड़ जल्दी पचता है और पोषण की शक्ति बढ़ाता है। गुड़ में प्रोटीन-6.6 चिकनाई–0.06 क्षार-65.0 कैल्शियम-0.05 फासफोरस-0.38 होता है। 100 ग्राम रस में 114 मि.ग्रा. लोहा होता है। गन्ने का रस पीने से मूत्र खुलकर आता है। नीबू का रस मिलाकर लेने पर गुणों में और भी वृद्धि हो जाती है। मूत्र के लिए गन्ने का रस गुणकारी है। | मूत्रकृच्छ में अधिक लाभ के लिए गन्ने के ताजे रस में आंवले का रस और शहद मिला लेना चाहिए। गन्ने का रस पुराने सिरके के साथ पीने से मूत्रकृच्छ में लाभ होता है। गन्ने के रस से राजयक्ष्मा में लाभ होता है। गन्ने का रस सुंघाने से नकसीर में लाभ होता है।
जट में मिलाकर पिलाने से पित्तजन्य वमन शान्त होती है। परिश्रम से आयी थकावट दूर करने के लिए गन्ने का रस टॉनिक के समान गण । गन्ने का ताजा रस-पान गरम वस्तुओं के सेवन से पैदा हुआ रक्त विकार, दाह, जलन आदि को शीघ्र दूर कर देता है। गन्ने के शद्ध ताजे उस के साथ जौ के सत्तू का सेवन करने से पाण्डु रोग भी दूर हो जाता है।

गन्ने के टुकड़े कर रात्रि के समय।

गन्ने के टुकड़े कर रात्रि के समय ओस में रख दें और प्रात:काल उन टुकड़ों को चूसें, तो थोड़े ही दिनों में पाण्डु रोग दूर हो जाता है। गन्ने का रस गुरु, स्निग्ध, वृहण, कफ कारक, मूत्रप्रवर्तक, रति शक्तिवर्द्धक, वीर्य में शीत तथा वातनाशक होता है, किन्तु भोजन के बाद पीने से वायु को प्रकुपित करने वाला है। यह रक्त एवं पित्त को शान्त करता है। रस एवं विपाक में मधुर तथा सरगुण वाला है। जल्दी से पच जाने वाला होता है। चूसे हुए गन्ने का रस वीर्यवर्द्धक,, शीतल, स्निग्ध, वृहण, मधुर तथा कफ कारक होता है। कोल्हू से निकला हुआ रस विदाही होता है। यदि समर्थ हों और दांत काम देते हों, छील सकते हों, तो गन्ना चूसकर ही खायें। मनुष्य के दांतों से चूसकर निकला हुआ गन्ने का रस अविदाही, कफ-पित्त कारक, वात-पित्तनाशक होता है।
वह मुख में अभिनव आनन्द की वृद्धि करता है। जिनके दांत हैं और जो गन्ना चूस-चूसकर धीरे-धीरे आनन्द लेकर खाते हैं, वे ही जान सकते हैं कि वह कितना मोददायी, ताजगी और चित्त को खुश करने वाला है। यदि उसमें नीबू का रस मिश्रित कर लिया जाये, तो वह और भी सुपाच्य और जायकेदार बन जाता है। पोषण की दृष्टि से यह ताकतवर है। यकृत और हृदय को मजबूत करता है। इसके अतिरिक्त गन्ने का चूसा हुआ रस पेट के विकार भी दूर करता है। बासा गन्ने का रस न पीना ही अच्छा है। हमेशा ताजा निकला रस पीना चाहिए।

गरम दूध में गुड़ मिलाकर पीने से।

गरम दूध में गुड़ मिलाकर पीने से पेशाब साफ़ आता है। रुकावट दूर होती है। गुड़ खाकर दो घण्टे बाद रति क्रीड़ा कर दाहिनी करवट सोने से स्त्री को अवश्य गर्भाधान होता है। यह क्रिया रजोदर्शन से निवृत होने के एक सप्ताह के भीतर करनी चाहिए। 100 ग्राम गुड़ में एक-एक चम्मच सोंठ और कालीमिर्च पीसकर मिलाकर खाने से खांसी-जुकाम मिट जाता है। मिश्री का टुकड़ा चूसने से खांसी शान्त होती है। दही और शक्कर फेंटकर खाने से पेट की जलन शान्त होती है तथा शौच खुलकर होता है। इस प्रकार गन्ने का रस, रस से निकले पदार्थ उपयोगी हैं। आप इनका लाभ उठायें। 
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