खुद को विशेष महसूस करना | The secret of positive thoughts in hindi

खुद को विशेष महसूस करना | The secret of positive thoughts in hindi

खुद को विशेष महसूस करना |
खुद को विशेष महसूस करना

पॉजिटिव थिंकिंग का सबसे पहला सीक्रेट है |

पॉजिटिव थिंकिंग का सबसे पहला सीक्रेट है–फीलिंग स्पेशल, यानी। इससे व्यक्ति अपने आप को स्पेशल फील करता है। याद रखिएगा–जिंदगी में स्पेशल वे ही लोग बनते हैं, जो दिल से। महसूस करते हैं कि वे दुनिया में स्पेशल हैं और कुछ विशेष करने के लिए पैदा हुए हैं तथा वे ऐसा कुछ करने वाले हैं। कि दुनिया को कुछ खास देकर ही जाएंगे। जो लोग पॉजिटिव थिंकिंग के धनी होते हैं, वे खुद को भूलकर भी सामान्य व्यक्ति नहीं मानते। ऐसा नहीं है कि उनके जीवन में दुःख-सुख नहीं आते, ऐसा भी नहीं है कि उनके सामने जटिल परिस्थितियां नहीं आतीं। जी हां एक आम इंसान की तरह उनके जीवन में भी परिस्थितियां पल-पल बदलती रहती हैं।
जय और पराजय मौसम के समान आते हैं। कुछ भी स्थिर नहीं रहता। लेकिन वे जानते हैं कि इंद्रधनुष बनने के लिए बारिश और धूप दोनों की जरूरत होती है। एक पूर्ण व्यक्ति बनने के लिए हमें जीवन के खट्टे-मीठे अनुभवों से गुजरना ही होता है। वे किसी भी परिस्थिति में निगेटिव नहीं सोचते। उन्हें इस सच्चाई का । पता रहता है कि हम अपनी जिंदगी की सभी घटनाओं पर नियंत्रण नहीं रखते।

लिंकन का जवाब
लिंकन का जवाब 
अमरीका के राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन को जीवन में भारी असफलताओं का सामना करना पड़ा, लेकिन उनके दिमाग में कभी नकारात्मक विचार नहीं आया। वे जीवन की हर समस्या को पॉजिटिव ढंग से सोचते रहे तथा उसका समाधान तलाश करते रहे। जब उनकी उम्र 22 वर्ष की थी तब उन्हें व्यापार में भारी असफलता का मुंह देखना पड़ा। 23 वर्ष की उम्र में विधायक के लिए चुनाव लड़ा और हार गए। 24 साल की उम्र में फिर व्यापार में उठने की कोशिश की तो बुरी तरह से असफल हो गए। जब 26 वर्ष के हुए तो उनकी प्रेमिका का देहांत हो गया। जब 27 साल के हुए तो । उनका स्वास्थ्य बुरी तरह से खराब हो गया और वे मरते-मरते बचे। 29 साल की उम्र में फिर एक नई असफलता उनके सामने थी। वे स्पीकर का चुनाव हार गए। 
31 साल की उम्र में तब एक और हार उनकी झोली में आ गई, जब वे इलेक्टर का । चुनाव हार गए। जब वे 39 साल के हुए तो अमरीकी कांग्रेस का चुनाव हार गए। इसके बाद 46 वर्ष की उम्र में वे फिर असफल हो गए, जब उन्हें सीनेट के चुनाव में भी हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद भी उनके जीवन में असफलताओं का सिलसिला खत्म नहीं हुआ और 47 साल की उम्र में वे उपराष्ट्रपति का चुनाव हार गए। और फिर 49 वर्ष की आयु में अमरीकी सीनेट के चुनाव में हार गए। | यानी हारने का सिलसिला लगातार चलता रहा मगर लिंकन ने इसकी कोई परवाह नहीं की। अनेक लोगों ने उनसे कहा-‘अब्राहम, कामयाबी तुम्हारी किस्मत में नहीं। अब तो हार मान लो। इस बात को कबूल कर लो कि तुम्हारा भाग्य अच्छा नहीं है। 
और जानते हैं, लिंकन ने उन्हें क्या जवाब दिया? उन्होंने कहा-‘पहले आप कबूल कर लीजिए कि मैं कोई आम इंसान नहीं हूं क्योंकि इतनी सारी असफलताएं किसी आम आदमी के जीवन में नहीं आया करतीं। मेरे जीवन में लगातार बड़ी-बड़ी असफलताएं आ रही हैं, जो इस बात का सबूत है कि मैं कोई सामान्य व्यक्ति नहीं हूं। सामान्य व्यक्ति के साथ ऐसा हो ही नहीं सकता। 
मैं जानता हूं और इस सच्चाई को समझता हूं कि बहुत बड़ा पद मिलना मेरे भाग्य में निश्चित है। इतनी बड़ी असफलताएं लगातार संकेत दे रही हैं कि मेरे नाम का डंका बजकर रहेगा और मैं इस दुनिया को वह दे जाऊंगा, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। पॉजिटिव थिंकिंग का यह सीक्रेट लिंकन जानते थे कि जिसने खुद को बड़ा फील कर लिया, बड़ा मान लिया, बड़ा समझ लिया, उसका बड़ा बनना निश्चित है। और जैसे ही वे 52 साल के हुए, अमरीका के 16वें राष्ट्रपति चुन लिए गए। 
उन्होंने अमरीका को उस समय की सबसे बड़ी चुनौति ‘गृह-युद्ध' से उबारा तथा दास प्रथा का अंत करके दिखाया। अपनी पॉजिटिव थिंकिंग की बदौलत आज भी वे पूरी दुनिया के हीरो माने जाते हैं तथा अमरीकी आज भी उन्हें अपना प्रेरणा-स्रोत मानते हैं। इस बात में जरा भी संदेह नहीं कि लिंकन की जगह कोई और होता तो निगेटिव थिंकिंग उस पर हावी हो चुकी होती। 
वह असफलताओं का इतना लम्बा दौर भुगत ही नहीं सकता था। लेकिन लिंकन पॉजिटिव थिंकिंग के बादशाह थे। खुद को स्पेशल मानते थे। इस सच्चाई को समझते थे कि जिंदगी हंसाती भी है और रुलाती भी है। जो हर । हाल में आगे बढ़ने की चाह रखते हैं, जिंदगी उसी के आगे सर झुकाती है।
एडीसन

एडीसन

जब मुस्करा दिए एडीसन

महान आविष्कारक और विश्व के जाने-माने उद्यमी थॉमस अल्वा एडीसन पॉजिटिव थिंकिंग का यह सीक्रेट्स अच्छी तरह से जानते थे कि फीलिंग स्पेशल का मतलब है वास्तव में स्पेशल बन जाना। इसलिए लगातार असफल होने के बावजूद उन्होंने स्वयं को कॉमनमैन नहीं माना तथा स्पेशल फील ही करते रहे। वे हमेशा मानते रहे कि उनका पृथ्वी पर जन्म बहुत कुछ खास करने के लिए ही हुआ है। बल्ब का
आविष्कार करते समय उनके दस हजार से भी अधिक प्रयोग असफल रहे। उनके मित्रों ने कहा-आखिर तुम क्या चाहते हो? दस हजार से भी ज्यादा बार असफल होने के बावजूद क्या तुम समझते हो कि बल्ब का आविष्कार कर लोगे?' एडीसन तब बहुत ही रहस्य भरे अंदाज में मुस्करा देते थे। उनका जवाब था-‘तुम ऐसा कह सकते हो कि मेरे दस हजार से भी ज्यादा प्रयोग असफल हो चुके हैं। लेकिन मेरा कहना है कि मैं दस हजार से भी अधिक ऐसे रास्तों के बारे में जान चुका हूं, जिन पर चलकर बल्ब का आविष्कार नहीं हो सकता। दुनिया में अगर कोई और ऐसा व्यक्ति हो तो मेरे सामने लाओ। दुनिया में केवल मैं ही एक ऐसा व्यक्ति हूँ दोस्तो, सिर्फ मैं। और कोई भी नहीं। और जान लो, बल्ब का आविष्कार भी दुनिया में मैं ही करूंगा, कोई और नहीं।'
और इतिहास गवाह है कि एडीसन ने न केवल बल्ब का आविष्कार करके पूरी दुनिया को रोशन किया, बल्कि उन्होंने अपने जीवन में 1093 अनूठे आविष्कार किए तथा आसमान पर लिख दिया कि पॉजिटिव थिंकिंग से बड़ी दुनिया में और कोई ताकत नहीं है। लेकिन एडीसन की कहानी मैं यही खत्म नहीं करूंगा। पॉजिटिव थिंकिंग से जुड़ी उनके जीवन की सबसे खास कहानी अभी सुनानी बाकी है। इस कहानी को पढ़ने के बाद आप भी एकमत से स्वीकार करेंगे कि जो व्यक्ति अपने आप को स्पेशल मान लेता है, वह पॉजिटिव थिंकिंग का कितना बड़ा जादूगर बन जाता है।

ऐसा नजारा फिर नहीं मिलेगा

एक सर्द रात में एडिसन की फैक्ट्री में रोज की तरह कामकाज का शोर हो रहा था। ऐसी अनेक योजनाओं पर काम चल रहा था जो एडिसन ने अपने सपनों को हकीकत में बदलने के लिए प्रारम्भ की थीं। ऐसा कहा जाता था कि लोहे और कंक्रीट से बनी एडिसन की फैक्ट्री फायरप्रूफ थी, लेकिन आग की ताकत का अनुमान लगाना मुश्किल है।
वर्ष 1914 की उस जमा देने वाली सर्द रात में फैक्ट्री धू-धू करके जल उठी। एडिसन के 24 वर्षीय पुत्र चाल्र्स ने अपने पिता को बड़ी मुश्किल से तलाश किया। जब एडीसन अपनी फैक्ट्री पहुंचे तो आग में जलती हुई फैक्ट्री का नजारा अपनी आंखों से देखा। उनके सफेद हो चुके बाल सर्द हवा में जोर-जोर से हिल रहे थे और आग की भभक उनके अविचल चेहरे को चमका रही थी। चार्ल्स को लगा कि कहीं उसके पिता अपनी कठोर मेहनत से कमाई पूंजी को इस तरह तबाह होता देखकर आत्मदाह न कर लें। लेकिन 67 वर्षीय एडीसन के चेहरे पर तो यह सब देखकर मुस्कान दौड़ गई। उन्होंने बेटे से पूछा-‘तुम्हारी मां कहां है?' बेटे ने जवाब दिया–‘मैं नहीं जानता। एडीसन कहने लगे–“अरे उसे जल्दी से तलाश करके लाओ। ऐसा दिलकश नजारा उसे जिंदगी में फिर कभी देखने को नहीं मिलेगा।
पूरी फैक्ट्री जलकर तबाह हो गई। एडीसन ने फैक्ट्री के अवशेषों को देखते हुए कहा-‘ईश्वर बहुत महान है। वह जानता है कि मैं कोई आम इंसान नहीं हूं। दुनिया का स्पेशल इंसान हूं। इतनी सारी उपलब्धियां मिल जाने के बाद मैं एक आम इंसान बन गया था और आराम करने लग गया था। मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था। अच्छा हुआ कि मेरी सारी गलतियां आग की भेंट चढ़ गईं। अब मैं नए सिरे से कुछ कर सकता हूं। मुझे ईश्वर ने एक अच्छा मौका दिया
दोस्तो, ऐसा केवल पॉजिटिव थिंकिंग का जादूगर ही कह सकता है। वही इंसान कह सकता है, जो अपने आप को लीक से हटकर मानता है। स्पेशल मानता है। ऐसा अद्भुत नजरिया उसी व्यक्ति का हो सकता है जो छाती ठोंककर कहता है—‘आई एम नॉट ए कॉमन मैन। आई एम स्पेशल ।। | ऐसा व्यक्ति ही मान सकता है कि, जिंदगी में जितनी अधिक असफलताएं आती हैं, जितने अधिक नुकसान होते हैं, जितना अधिक जीवन में छिनता है, उससे कई गुना मिलकर रहता है। और इतिहास गवाह है कि एडीसन उसी समय अपना एक छोटा-सा नया ऑफिस तैयार करने में जुट गए ताकि कामयाबी का अगला इतिहास लिख सकें।

अदृश्य दिखाई देता है, अमूर्त महसूस होता है।

जो लोग पॉजिटिव थिंकिंग के धनी होते हैं, उनमें प्राकृतिक तौर पर इतनी शक्ति आ जाती है कि अदृश्य दिखाई देने लग जाता है और अमूर्त महसूस होने लग जाता है। वे महसूस करते हैं कि उनके पास ऐसा कुछ जरूर है, जो औरों के पास नहीं है। परमात्मा ने उन्हें सबसे अलग कुछ दिया है, जिसकी बदौलत वे दुनिया के अन्य लोगों से बिल्कुल अलग हैं।
डार्विन पी. किन्सले ने कहा है कि जो लोग पॉजिटिव थिंकिंग के धनी होते हैं, वे कभी भी यह नहीं सोचते कि क्या खो रहे हैं, बल्कि वे यह सोचते हैं कि उनके पास ऐसा क्या है, जो बाकी लोग खो रहे हैं। वे हर नकारात्मक घटना को भी पॉजिटिव में ढालने की ताकत रखते हैं। वे जानते हैं कि अगर उन्होंने अपने नकारात्मक विचारों को सकारात्मक में बदल दिया तो उसके सकारात्मक परिणाम आने शुरू हो जाएंगे।
वास्तु शास्त्र बहुत अच्छे ढंग से पॉजिटिव थिंकिंग को डिफाइन करता है। इस शास्त्र में साफ लिखा है—जिस घर मंन प्राकृतिक रोशनी आती है, कोने और दीवारें साफ-सुथरी रहती हैं, दरवाजों और खिड़कियों में गंदगी नहीं होती, बेडरूम चमकता रहता है, पढ़ाई वाला कमरा ज्यादा प्रकाश वाला होता है और टॉयलेट मुख्यद्वार के सामने नहीं होती, उस घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है, जिससे उस घर में रहने वाले लोग हमेशा खुश रहते हैं और बीमार नहीं होते। साथ ही ऐसे घरों में लक्ष्मी का वास होता है। आप समझ रहे हैं न वास्तु शास्त्र के इस महत्त्वपूर्ण सिद्धांत को, जीवन भी एक वस्तु है, विभिन्न सिद्धांतों, परम्पराओं, कानूनों के ईंट-गारों से मिलकर इसका निर्माण होता है। यदि सिद्धांतों और परम्पराओं की रूढ़ियों ने जीवन को इतना जकड़ लिया, इतना बंद कर दिया कि किसी नई बात के लिए जीवन में जगह ही शेष नहीं रहा तो हमारी आत्मा उसी तरह बिना वायु और प्रकाश के सिकुड़ जाएगी, बीमार हो जाएगी जिस प्रकार हम किसी अंधेरे और शुद्ध वायु रहित कमरे में हो जाएंगे। मानसिक रूप से स्वीकार्यता का भाव वे खिड़कियां हैं जिनसे होकर सकारात्मकता का प्रकाश हमारे अंदर प्रवेश करता है। और सकारात्मक सोच वह स्वस्थ जीवन है जो इस शुद्ध वायु और प्रकाश से हम प्राप्त करते हैं। सकारात्मक सोच की अदृश्य ऊर्जा हमारे अंदर अतुलित और असीमित प्रकाश भर देती है।
सकारात्मक ऊर्जा सकारात्मक सोच से उत्पन्न होती है। सकारात्मक ऊर्जा उसी व्यक्ति को मिलती है, जो सकारात्मक सोचता है। मेरा तो यह मानना है कि सकारात्मक सोच का व्यक्ति ही अपने घर को सकारात्मक ऊर्जा से भर सकता है। और जब दिलो-दिमाग और घर सकारात्मक ऊर्जा से भर जाते हैं तो जीवन में फिर किसी। चीज की कमी नहीं रहती। संसार के सभी सुख झोली में आ जाते हैं। दूसरे लोगों से वे सकारात्मक व्यवहार करते हैं। अगर कोई निगेटिव थिंकिंग का व्यक्ति भी उनके जीवन में आ जाता है तो वे उनकी थिंकिंग को पॉजिटिव बना डालते हैं। सच तो यह है कि पॉजिटिव थिंकिंग रखने वाला व्यक्ति बहुत ही खास होता है। वह अपने आप । को खास यानी स्पेशल ही महसूस करता है। उसकी जिंदगी में जो भी होता है, वह स्पेशल ही होता है। वह स्पेशल सोचता है, स्पेशल करता है तथा दुनिया को कुछ न । कुछ स्पेशल देकर ही जाता है।

कैसे कोई अपनी पॉजिटिव थिंकिंग के सहारे अपने आपको विशेष बना देता है

यह स्पेशिलिटी क्या है, कैसे कोई अपनी पॉजिटिव थिंकिंग के सहारे अपने आपको विशेष बना देता है इस सम्बंध में एक बड़ी उम्दा कहानी है जो मैं आपको बताना चाहता हूं। | एक आदमी चर्च में नौकरी करता था। उसकी ड्यूटी थी चर्च का घंटा बजाना, कई साल हो गए थे उसे ये नौकरी करते हुए। अचानक एक दिन पोप का आदेश हुआ कि चर्च में वही नौकरी कर सकेगा जो कम-से-कम मैट्रिक पास होगा। अब ये आदमी तो पढ़ा-लिखा भी नहीं था। सो चर्च ने उसे हटा दिया। चर्च से निकलकर वह घर की ओर जा रहा था, परंतु वह निराश नहीं था, क्योंकि वह जानता था कि सम्भावनाएं कभी खत्म नहीं होतीं। अचानक उसे सिगरेट की तलब लगी। परंतु चर्च के आस-पास तो एक-दो किलोमीटर तक सिगरेट की कोई दुकान नहीं थी। सिगरेट की तलब लिए वह चलता गया और सोचता गया। । दूसरे दिन उसने चर्च के पास ही एक सिगरेट बेचने का खोखा लगा दिया। उसकी दुकान चल निकली। कुछ ही वर्षों में वह वहां की ढेरों दुकानों का मालिक था। जल्दी ही उसने सिगरेट बनाने की फैक्ट्री लगा ली। धीरे-धीरे वह शहर का बड़ा अमीर बन गया। एक दिन उससे कुछ पत्रकार मिलने आए, पत्रकारों ने उससे पूछा कि यदि वह आज व्यवसायी नहीं होता तो क्या होता। उसका जवाब था ‘रिंगिंग इन द चर्च चर्च में घंटा बजा रहा होता। यही है सकारात्मक सोच का स्पेशलाइजेशन।
तो फिर क्या समझे जनाब? सच-सच बताइए, पॉजिटिव थिंकिंग का सीक्रेट नम्बर वन—फीलिंग स्पेशल आपकी समझ में आया या नहीं। आप इस सच्चाई को जान पाए या नहीं कि अगर आप निगेटिव थिंकिंग को ठोकर मारकर पॉजिटिव थिंकिंग को गले लगाएंगे तो यह क्वालिटी अपने आप आप में आ जाएगी। आपकी सोच भी लिंकन और एडीसन जैसी हो जाएगी। जिंदगी में जितनी असफलताएं आएंगी, आप उनका स्वागत करेंगे। खुलकर कहेंगे कि आपके जीवन में ज्यादा असफलताएं इसलिए आ रही हैं क्योंकि आप स्पेशल हैं। आप कॉमन मैन नहीं हैं। आप वह करके दिखाएंगे, जो आज तक कोई नहीं कर सका।
अगर पॉजिटिव थिंकिंग का सीक्रेट नम्बर वन आप पूरी तरह से समझ चुके हैं। तो बधाई। अब आगे बढ़ते हैं। पॉजिटिव थिंकिंग के सीक्रेट नम्बर टू को जानते और समझते हैं। यानी इस अनूठे ब्रह्मांड की सैर करने और आगे निकलते हैं।
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